
शब्दजाल न्यूज़ भोपाल
जांच में सामने आया है कि नगर निगम के फंड को फर्जी तरीके से अपने करीबियों और रिश्तेदारों की कंपनियों में डाला जा रहा था।
-मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नगर निगम में लोकायुक्त के छापामार कार्रवाई को लेकर अपडेट सामने आया है।
-लोकायुक्त पुलिस द्वारा करोड़ों रुपये के फर्जी बिल घोटाले में अपर आयुक्त (वित्त) गुणवंत सेवितकर के खिलाफ एफआईआर(FIR) दर्ज किए जाने के बाद प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है।

-कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद लोकायुक्त की टीम ने यह कार्रवाई की थी।अपर आयुक्त पद से हटाए गए लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किए जाने के बाद निगम प्रशासन ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है।
-आरोपी अपर आयुक्त (वित्त) गुणवंत सेवतकर को वित्त विभाग के प्रभार से हटा दिया गया है। अब उनकी जगह अपर आयुक्त मुकेश शर्मा को नगर निगम के वित्त विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
-इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र कंप्यूटर शाखा और वित्त विभाग रहा।आरोप है कि उन्होंने SAP सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर अपने करीबियों और रिश्तेदारों की फर्मों को करोड़ों का फर्जी भुगतान किया। लोकायुक्त ने निगम के सर्वर सेंटर से 10 साल का डेटा और हार्ड डिस्क जब्त की है।
-नगर निगम में करोड़ों की हेरा फेरी भोपाल नगर निगम के अपर आयुक्त (वित्त) गुणवंत सेवितकर के खिलाफ लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। लोकायुक्त की विशेष पुलिस टीम ने शुक्रवार को फतेहगढ़ स्थित निगम मुख्यालय के खुलते ही छापामार कार्रवाई की थी।
खबर के मुख्य बिंदु –
-फर्जी बिल से लाखों के भुगतान के दस्तावेज जब्त, सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ पर अपर आयुक्त के खिलाफ फिर रिश्तेदारों के खातों में करोड़ों का ट्रांजेक्शन लेनदेन लोकायुक्त की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि फर्जी कामों के बिल लगाकर सरकारी खजाने से पैसा निकालकर सीधे अधिकारियों के परिचितों और रिश्तेदारों की फर्मों में भेजा गया।
-इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए निगम के SAP सिस्टम (सॉफ्टवेयर) में छेड़छाड़ की गई थी।10 साल का रिकॉर्ड और हार्ड डिस्क जब्तलोकायुक्त की टीम ने कोर्ट से सर्च वारंट लेकर सर्वर सेंटर पर धावा बोला।
– टीम ने मौके से पिछले 10 साल के पुराने बिलों और भुगतानों से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई SAP सिस्टम की हार्ड डिस्क को जब्त करना रही।
– अब फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स यह पता लगाएंगे कि किन यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर फर्जी बिलों को अप्रूव किया गया था।
– मानना है कि यह घोटाला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। इसमें कंप्यूटर शाखा के कर्मचारी, फील्ड इंजीनियर और कुछ ठेकेदारों की मिली भगत होने की प्रबल संभावना है।
– जब्त किए गए डिजिटल डेटा से कई अन्य रसूखदारों के नाम सामने आने की उम्मीद है।लोकायुक्त की प्राथमिक जांच के अनुसार, यह पूरा खेल अकेले संभव नहीं था। इसमें नगर निगम के ठेकेदारों, फील्ड इंजीनियरों, वित्त विभाग और कंप्यूटर शाखा के कर्मचारियों की एक बड़ी चेन शामिल है।
-फर्जी बिलों को सिस्टम में चढ़ाने से लेकर उनके भुगतान तक की प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखा गया।फर्जी बिल घोटाले का खुलासा होने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। अब जांच का दायरा बढ़ गया है,
– नगर निगम के कई अन्य बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है। फिलहाल, टीम जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को खंगाल रही है ताकि इस पूरे मामले का पर्दाफाश किया जा सके।
